Monday, July 26, 2010
Zindagi
Posted on 4:29 PM by Nimisha
ज़िन्दगी एक आस है , एक अन कही सी प्यास है
मंजिल लगे जो दूर है , डटकर बढ़ो तो पास है
मृगजल के सम है ज़िन्दगी , साये की तरह है हर ख़ुशी ,
दौडोगे जितना पास इसके उतनी ही ये निराश है ,
क्यों प्यास सबको है यहाँ , क्यों है गमो की सुर्खियाँ ,
लगता है सब कुछ पा लिया , फिर क्यों है दिल में खालियाँ,
नहीं बस हुआ अब ये समां , दुखड़ा जो दुनिया का सुना ,
मैंने तो दुःख के जाल में , आशा का सपना है बुना ,
जी कर रहूंगी ज़िन्दगी , पा कर रहूंगी हर ख़ुशी ,
जब ठान लोगे बात यह,पा लोगे तुम सारा जहाँ ....... :)
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